हड्डियों की परख से हुआ खुलासा: 14 साल का बच्चा निकला 18 का , मेडिकल और अदालत में मची हलचल

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हड्डियों की परख से हुआ खुलासा: 14 साल का बच्चा निकला 18 का , मेडिकल और अदालत में मची हलचल
हड्डियों की परख से हुआ खुलासा: 14 साल का बच्चा निकला 18 का , मेडिकल और अदालत में मची हलचल

हम सब अपनी उम्र को कैलेंडर की नजरों से देखते है। जन्म प्रमाणपत्र पर लिखी तारीख को ही सच मानते हैं। लेकिन मेडिकल विज्ञान अब इस सोच को बदल रहा है। दरअसल, वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारी हड्डियां हमारी असली उम्र बता सकती है। यह सिर्फ एक मेडिकल टर्म नहीं है, बल्कि अब यह स्वास्थ्य जांच, कानूनी फैसलों और खेलों में फेयर प्ले का आधार बन चुका है।

क्या होती है हड्डी की उम्र?

हड्डी की उम्र को समझने के लिए डॉक्टर आमतौर पर हाथ या कलाई की एक्स-रे करते है। इन एक्स-रे को ग्रेवुलिक (Greulich and Pyle) या टैनर-व्हाइटहाउस (Tanner-Whitehouse) नामक स्टैंडर्ड्स से मिलाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि किसी व्यक्ति की हड्डिया। उसकी असली उम्र के मुकाबले कितनी परिपक्व है। उदाहरण के लिए, किसी बच्चे की जन्मतिथि के अनुसार वह 14 साल का हो सकता है, लेकिन उसकी हड्डियां 16 साल के किशोर जैसी परिपक्वता दिखा सकती हैं। इसे Skeletal Maturity कहा जाता है।

हड्डी की उम्र: वैज्ञानिक आधार क्या है?

शरीर की हड्डियां उम्र के साथ एक खास पैटर्न में विकसित होती हैं। बच्चों और किशोरों की हड्डियों में एपीफीसिस (Epiphysis) और मेटाफीसिस (Metaphysis) नामक हिस्से जुड़े होते हैं, जो विकास के दौरान अलग-अलग दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ये भाग जुड़कर एक ठोस संरचना बनाते हैं। एक्स-रे से कलाई या हाथ की हड्डियों की बनावट देखी जाती है। इसे Greulich and Pyle Atlas या Tanner-Whitehouse Method से तुलना किया जाता है। यह माप शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम (हार्मोन संतुलन) और कंकाल विकास को दर्शाता है।

बच्चों के इलाज में अहम भूमिका

बच्चों के विकास से जुड़ी समस्याओं में बोन एज बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बच्चा अपनी उम्र के अनुसार लंबाई में नहीं बढ़ रहा या यौवन (Puberty) समय से पहले या बाद में आ रहा है, तो डॉक्टर Bone Age Test के आधार पर हार्मोनल जांच और इलाज तय करते हैं।
यह प्रक्रिया Growth Hormone Therapy, Thyroid Disorders और कुछ अनुवांशिक बीमारियों के इलाज में भी सहायक होती है।

कानून में भी अहम सबूत

जब किसी व्यक्ति की उम्र संदेह के घेरे में होती है। जैसे – नाबालिग होने का दावा, बाल मजदूरी, अपराध या शरणार्थी पहचान , तब अदालतें बोन एज रिपोर्ट को महत्वपूर्ण सबूत मानती हैं। हालांकि यह 100% सटीक नहीं मानी जाती, फिर भी 3-4 साल तक की त्रुटि सीमा के भीतर इसे मान्य आधार के तौर पर स्वीकार किया जाता है।

खेलों में आयु धोखाधड़ी पर लगाम

खासकर क्रिकेट, एथलेटिक्स, कबड्डी, और कुश्ती जैसे खेलों में खिलाड़ियों द्वारा उम्र कम बताने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में Bone Age Test को अब अनिवार्य रूप से अपनाया जा रहा है, ताकि अंडर-17 और अंडर-19 टूर्नामेंट्स में धोखाधड़ी रोकी जा सके। बीसीसीआई (BCCI) और अन्य खेल संघ भी इस तकनीक का उपयोग करते हैं ताकि प्रतियोगिताएं निष्पक्ष बनी रहें।

AI और जीन के साथ भविष्य की दिशा

अब वैज्ञानिक सिर्फ एक्स-रे तक सीमित नहीं हैं। नई रिसर्च AI (Artificial Intelligence) और जीनोमिक डाटा की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन जीन का हड्डियों की बनावट और विकास पर असर होता है। इससे भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस, आर्थराइटिस और बोन कैंसर जैसी बीमारियों का पूर्वानुमान और इलाज पहले से संभव हो सकेगा।

सिर्फ जन्मतिथि नहीं, अब हड्डियाँ भी बताती हैं सच

Bone Age अब सिर्फ डॉक्टर की फाइल का हिस्सा नहीं है। यह एक ऐसा वैज्ञानिक टूल बन चुका है जो इंसान की शारीरिक, सामाजिक और कानूनी पहचान को समझने में मदद करता है। विज्ञान यह मानता है कि हड्डियाँ शरीर के हार्मोनल बदलावों के प्रति संवेदनशील होती हैं। इसलिए अगर यौवन जल्दी आ जाए या थायरॉइड गड़बड़ हो, तो हड्डी की उम्र में अंतर देखा जा सकता है।