MD ड्रग सिंडिकेट पर ANTF का शिकंजा: मुंबई की केमिकल सप्लाई से बेंगलुरु की लैब्स और राजस्थान तक फैला नेटवर्क

0
0

By: सर्वजीत सोनी | Edited By: उमेश चंद्र

महाराष्ट्र एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने देश के सबसे संगठित मेफेड्रोन (MD) ड्रग नेटवर्क में से एक के खिलाफ बहु-राज्यीय कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट मुंबई के वैध केमिकल और फार्मास्यूटिकल बाजार की आड़ लेकर बेंगलुरु में अवैध ड्रग लैब्स चलाता था और राजस्थान के जोधपुर–चित्तौड़गढ़ इलाके को लॉजिस्टिक्स व शरणस्थली के रूप में इस्तेमाल करता था।

ANTF की यह कार्रवाई सिर्फ ड्रग बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई-चेन मॉडल — कच्चे माल की खरीद, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, शेल कंपनियां और राज्यों के बीच नेटवर्क, को उजागर करने पर केंद्रित है।

55 करोड़ की MD जब्ती और तीन अवैध फैक्ट्रियों का भंडाफोड़

जांच एजेंसी ने बेंगलुरु में संचालित तीन अवैध MD निर्माण इकाइयों पर छापेमारी कर 4.1 किलोग्राम ठोस और 17 किलोग्राम तरल मेफेड्रोन बरामद की, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹55 करोड़ बताई जा रही है। इसके साथ भारी मात्रा में केमिकल प्रीकर्सर, रिएक्टर, सॉल्वेंट्स और अन्य उपकरण जब्त किए गए।

अधिकारियों के मुताबिक, ये फैक्ट्रियां शहरी इलाकों में सामान्य औद्योगिक गतिविधियों की तरह दिखाई जाती थीं ताकि किसी को शक न हो।

मुंबई कनेक्शन: वैध कारोबार की आड़ में अवैध डायवर्जन

जांच का सबसे संवेदनशील पहलू मुंबई और पनवेल स्थित फार्मास्यूटिकल व केमिकल सप्लाई नेटवर्क से जुड़ा है। ANTF को संदेह है कि MD निर्माण में इस्तेमाल होने वाले नियंत्रित रसायन, APIs और सिंथेटिक इंटरमीडिएट्स वैध लाइसेंस के तहत खरीदे गए, लेकिन बाद में उनका एक हिस्सा अवैध रूप से डायवर्ट कर दिया गया।

इन रसायनों को शेल कंपनियों के जरिए दिखावटी लेन-देन के रूप में खरीदा गया, ताकि वास्तविक एंड-यूज छिपाया जा सके। एजेंसी अब खरीद की मात्रा, सप्लायर, ट्रांसपोर्ट रूट और एंड-यूज सर्टिफिकेट्स का मिलान कर रही है।

कौन हैं मास्टरमाइंड?

जांच में योगेंद्र कुमार उर्फ “योगी”, मोहम्मद सैफ मलिक और नयन पवार को नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया जा रहा है। वहीं प्रशांत यल्लप्पा पाटिल उर्फ “डॉक्टर” को प्रमुख MD निर्माता के रूप में चिन्हित किया गया है।

Untitled design 2026 01 03T150335.380

ANTF के अनुसार, पाटिल ने पवार को ₹3 लाख ट्रांसफर किए थे, ताकि औद्योगिक और फार्मा-ग्रेड रसायनों की खरीद और सप्लाई सुचारु रखी जा सके। पूछताछ में यह भी सामने आया कि पाटिल कई बार बेंगलुरु और जोधपुर की लैब्स में जाकर उत्पादन की निगरानी कर चुका है।

ड्यूल-यूज केमिकल्स का दुरुपयोग

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सिंडिकेट ने ऐसे रसायनों का चयन किया जिनका वैध और अवैध—दोनों तरह का उपयोग संभव है:
• 4-मेथाइलप्रोपियोफिनोन: इत्र, फ्लेवरिंग और कुछ दवाओं में वैध उपयोग
• मेथाइलएमीन: कीटनाशक, हर्बीसाइड और जीवनरक्षक एंटीबायोटिक्स में इस्तेमाल
• ब्रोमीन, टोल्यून, एसीटोन: वाटर ट्रीटमेंट, पेंट और क्लीनिंग इंडस्ट्री में आम

इन रसायनों को वैध सप्लाई चैन से निकालकर गुप्त लैब्स तक पहुंचाया गया।

राजस्थान एंगल: शरण और ट्रांजिट ज़ोन

जांच में सामने आया है कि राजस्थान के जोधपुर और चित्तौड़गढ़ इलाके केवल ठिकाने नहीं थे, बल्कि ट्रांजिट और फाइनेंशियल मूवमेंट के लिए भी इस्तेमाल किए गए। ANTF की टीमें राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

नवी मुंबई बेलापुर कोर्ट अपडेट

चार गिरफ्तार आरोपियों को CBD बेलापुर जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 6 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। एजेंसी का कहना है कि हिरासत के दौरान सप्लाई-चेन, फाइनेंशियल लिंक और फार्मा कंपनियों की भूमिका को लेकर अहम खुलासे हो सकते हैं।

ANTF अब शेल कंपनियों की फॉरेंसिक ऑडिट,फार्मा और केमिकल कंपनियों को समन बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन की डीप एनालिसिस अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की पहचानपर फोकस कर रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक केस नहीं, बल्कि ड्रग माफिया के पूरे इकोसिस्टम को तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।यह कार्रवाई एडिशनल डीजीपी सुनील रामानंद, एसआईजी शारदा राउत, डीआईजी प्रवीण कुमार पाटिल के मार्गदर्शन में पुणे एक्शन ग्रुप की टीम ने की है। जिसमें एसपी एम। एम। मकंदर, एएसपी कृष्ण पिंगले आदि शामिल थे। महाराष्ट्र में ने सात डिविजनल ऑफिस बनाए हैं और ड्रग तस्करी पर सख्ती बरती जा रही है। नागरिकों से अपील की गई है कि ड्रग्स संबंधी जानकारी गोपनीय रूप से हेल्पलाइन 07218000073 पर दे।