राम भक्तों के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने आज एक बड़ा एलान किया। उन्होंने गुरुवार को त्रिपुरा में कहा कि अगले साल 1 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा। इस घोषणा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अगले साल लोकसभा चुनाव भी होने हैं। राम मंदिर पार्टी की स्थापना के समय से ही बीजेपी के लिए अहम मुद्दा रहा है। मंदिर के उद्घाटन के मुद्दे को पार्टी वोटरों के बीच ले जाने की पूरी कोशिश करेगी। मालूम हो कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के निर्माण के लिए रास्ता साफ कर दिया था। इसके बाद 2020 में पीएम मोदी ने राम मंदिर की नींव रखी थी। वे भूमिपूजन करने के लिए अयोध्या पहुंचे थे। राम मंदिर निर्माण इस समय अयोध्या में तेजी से किया जा रहा है। बता दें कि पिछले साल नवंबर में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि साल 2023 के आखिर तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा। नवंबर तक मंदिर का निर्माण कार्य आधा पूरा हो चुका था।

80 के दशक में उठी मंदिर की मांग
बता दें कि 1822 में पहली बार दावा किया गया था कि बाबरी मस्जिद रामजन्मभूमि पर बनी है। 1855 में पहली बार मामले में सांप्रदायिक हिंसा हुई, 1859 में विवाद को रोकने के लिए रेलिंग बनायी गयी। इसके बाद जब देश आजाद हुआ तो 1949 में मस्जिद में मूर्तियां रखी गयीं, जिसके बाद मस्जिद को ताला लगा दिया गया। 1980 आते-आते राममंदिर की मांग उठने लगी। 1986 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने ताला खोल दिया और हिंदुओं को विवादित स्थल पर पूजा करने की इजाजत मिल गयी। 1990 में बीजेपी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर के लिए रथ यात्रा निकाली। 1992 में बाबरी विध्वंस हुआ। इसके बाद साल 2019 तक हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने रामजन्मभूमि को अपने अधिकार में लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी।
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