नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में भारत शिक्षा समिट का आयोजन किया गया। ‘शेपिंग द फ्यूचर ऑफ एजुकेशन’ की थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में कई राजनेता, शिक्षाविद्, कानूनविद्, नीति निर्माता शामिल हुए। कार्यक्रम के दूसरे सत्र की थीम ‘द विजन ऑफ नेशनल एजुकेशन पॉलिसी’ थी। इस सत्र में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि शिक्षा एक व्यक्तिगत यात्रा है अपने आत्म की एक यात्रा है। बच्चों के भीतर जो है अगर वह पहचान सके तो निश्चित तौर पर वह जीवन में सफल होगा। कबीरदास अपना नाम लिखना नहीं जानते थे लेकिन आज उन पर इतने लोगों ने पीएचडी की है। व्यक्ति को अपने मन की आवाज पहचानने की जरूरत है। प्राथमिक काम यही होना चाहिए कि बच्चे की अंतर्ध्वनि पहचानें।
यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि हमारा इतिहास कहता है कि नालंदा और तक्षशिला ने विश्व का मागदर्शन करने का काम किया था। आज नई शिक्षा नीति भविष्य की पीढ़ी को तैयार करने का काम कर रही है। आपको केवल ज्ञान चाहिए नौकरी आपके पीछे घूमेगी। युवा आने वाले भविष्य की तस्वीर है। युवा आने वाले समय में नौकरी मांगेगा नहीं नौकरी देगा।
सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि हमें देश के भविष्य को अच्छी शिक्षा देने की आवश्यकता है। जैसा कि वेदांत कहता है कि हमें स्वधर्म पर ध्यान देने की आवश्यकता है। शिक्षा हम सभी को साथ लाती है। आने वाली पीढ़ी को शिक्षित कर हम निवेश करने का काम करेंगे।
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी की सेक्रेटरी जनरल पंकज मित्तल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति धीरे धीरे लागू की जाएगी। इसके तहत क्लासरूम में चर्चा पर जोर दिया जाएगा। एप्लीकेशन ओरिएंटेड स्टडी पर ध्यान दिया जाएगा। इसलिए इंटर्नशिप को जरूरी किया गया है।
कार्यक्रम में तनु जैन ने कहा कि अपनी जड़ों की ओर वापसी करने की जरूरत है।