नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में भारत शिक्षा समिट का आयोजन किया गया। ‘शेपिंग द फ्यूचर ऑफ एजुकेशन’ की थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में कई राजनेता, शिक्षाविद्, कानूनविद्, नीति निर्माता शामिल हुए। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि बच्चों की शिक्षा के लिए माता पिता खुद को मिटा देते हैं। शिक्षा की चाबी से जंग लगा ताला भी खुल जाता है। देश की आजादी के बाद समान शिक्षा होनी चाहिए थी। दिल्ली के हुक्मरानों की गलती गांव देहात के बच्चों को भुगतनी पड़ती है।
कार्यक्रम में इतिहासकार विक्रम संपत ने कहा कि किसी देश को बर्बाद करना चाहते हैं तो उनको उनके इतिहास की गलत समझ बना दें। इतिहास की विकृत समझ अंग्रेजों की देन है। इतिहास को भारत के नजरिए से लिखे जाने की जरूरत है। हमारे पुराण बताते हैं कि भारत का इतिहास कितना पुराना है। ये देश कोई अंग्रेजों का बनाया देश नहीं है।
कवि, गीतकार , पत्रकार आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि आज के समय में हम बहुत आत्मकेंद्रित हो गए हैं। ऐसे में शिक्षा पर बात करना बहुत सराहनीय है। इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय की वीसी रंजना झा, जीटीसी ग्रुप के अध्यक्ष आरके महतो और एनएलयू दिल्ली के संस्थापक रनबीर सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।