Share Market After Union Budget 2026: केंद्रीय बजट पेश होने के बाद शेयर बाज़ार में तेज़ गिरावट दर्ज की गई। बजट में पूंजी बाज़ार से जुड़े कर ढांचे में किए गए अहम बदलावों, खासकर डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाने और शेयर बायबैक पर कर नियमों में संशोधन, ने निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। नतीजतन, कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में भारी बिकवाली देखने को मिली।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ नीचे आया, जबकि निफ्टी भी अहम स्तर से फिसल गया। गिरावट का असर सिर्फ़ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा दबाव देखने को मिला, जिससे खुदरा निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
दरअसल, विशेष ट्रेडिंग सत्र के दौरान निवेशकों की आक्रामक बिकवाली के चलते निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स दोनों ही सूचकांक 1% से अधिक लुढ़क गए। निफ्टी 50 महत्वपूर्ण 25,000 अंक के स्तर से नीचे फिसल गया, जबकि सेंसेक्स कारोबार के दौरान करीब 1,600 अंकों तक टूट गया। हालांकि, दिन बढ़ने के साथ निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से बाजार ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश की और गिरावट में आंशिक सुधार दर्ज हुआ।
डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ना बना मुख्य कारण
बजट में सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाने का ऐलान किया है।
- फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया।
- ऑप्शंस प्रीमियम पर STT 0.10% से बढ़ाकर 0.15% कर दी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में डेरिवेटिव ट्रेडिंग का वॉल्यूम बहुत बड़ा है। ऐसे में STT बढ़ने से ट्रेडिंग लागत सीधे तौर पर बढ़ गई, जिससे हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग, हेजिंग और शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग पर असर पड़ने की आशंका है। इसी कारण बजट के तुरंत बाद बाजार में तेज़ बिकवाली देखी गई।
शेयर बायबैक पर टैक्स नियमों में बदलाव
बजट में एक और बड़ा बदलाव शेयर बायबैक के टैक्स ढांचे को लेकर किया गया। अब शेयर बायबैक से होने वाली आय को पूंजीगत लाभ (Capital Gains) के रूप में टैक्स किया जाएगा।
इससे पहले बायबैक कंपनियों के लिए टैक्स-एफिशिएंट तरीका माना जाता था, जिससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता था। नए नियमों से
- कंपनियों की कैपिटल रिटर्न रणनीति प्रभावित होगी,
- और प्रमोटरों व बड़े निवेशकों पर अतिरिक्त टैक्स बोझ बढ़ सकता है।
बाज़ार ने इस बदलाव को कॉरपोरेट सेक्टर के लिए नकारात्मक संकेत के रूप में लिया।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा असर
बजट के बाद की गिरावट में बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, मेटल, ऑयल एंड गैस, और ब्रोकरेज व एक्सचेंज से जुड़े शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। हालांकि आईटी और हेल्थकेयर जैसे कुछ सेक्टरों में सीमित खरीदारी दिखी, लेकिन यह व्यापक गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी
बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के बाद इस तरह की अस्थिरता सामान्य है। आने वाले दिनों में निवेशक बजट घोषणाओं के वास्तविक प्रभाव, कॉरपोरेट नतीजों, और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों
पर नजर रखेंगे।
फिलहाल विशेषज्ञ निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय सतर्क और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि निकट भविष्य में बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, लेकिन नीतिगत स्पष्टता आने के बाद स्थिति में सुधार संभव है।









