मणिपुर में आज एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन आज समाप्त कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। पिछले साल फरवरी से हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के बीच मणिपुर में केंद्रशासन लागू था, लेकिन अब राज्य में स्थिर शासन व्यवस्था बहाल होने जा रही है।
सरकार के सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि राज्य अब पुनः शांति, विकास और सुशासन के पथ पर अग्रसर होने के लिए तैयार है। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि अनुभवी नेतृत्व के साथ मणिपुर के लोगों को नई उम्मीद और प्रगति के अवसर मिलेंगे।
राष्ट्रपति शासन हटने के बाद आज शाम 6 बजे यूमनाम खेमचंद सिंह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह राजधानी इंफाल के ‘लोक भवन’ में आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सुबह से ही तैयारियां जोरों पर हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों तथा आम जनता का जमावड़ा देखा जा रहा है।
भाजपा की मणिपुर इकाई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी शपथ समारोह की पुष्टि की है। पार्टी ने बताया कि यह समारोह आज शाम छह बजे होगा और इसमें प्रदेश की नई सरकार का गठन औपचारिक रूप से होगा।
यूमनाम खेमचंद सिंह ने पहले ही लोक भवन पहुंचकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल श्री अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर विधानसभा में बहुमत का दावा रखा था। इस प्रतिनिधिमंडल में चुराचांदपुर और फेरजाल जैसे कुकी-जो समुदाय वाले जिलों के विधायक भी शामिल थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि गठबंधन में क्षेत्रीय एवं समुदाय विशेष की साझेदारी मजबूत है।
इससे पहले मंगलवार को नई दिल्ली में भाजपा विधायकों की बैठक में खेमचंद सिंह को पार्टी की विधायक दल की कमान दी गई थी। उसके बाद एनडीए विधायक दल ने भी उन्हें अपना नेता चुना, जिससे मुख्यमंत्री बनने की राह साफ हो गई। भाजपा के एक विधायक थोंगबम बिस्वजीत ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया था कि खेमचंद सिंह के साथ-साथ पांच अन्य विधायकों को भी मंत्री के रूप में शपथ दिलाई जाएगी, जो राज्य में सत्ता साझा करने की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
राज्य में राष्ट्रपति शासन के दौरान प्रशासनिक नियंत्रण सीधे केंद्र सरकार के पास था और मुख्य सचिव तथा प्रमुख सचिव के नेतृत्व में स्थिति को नियंत्रित किया जा रहा था। हिंसा और अशांति के कारण विधानसभा में कार्यवाहक सरकार न होने के कारण राष्ट्रपति शासन लागू करना और भी आवश्यक हो गया था। इसके हटने के साथ ही अब विधानसभा में बहुमत साबित करने वाली सरकार राज्य के प्रशासन और राजनैतिक स्थिति को पुनः नियंत्रित करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शांति बहाल होने के साथ ही मणिपुर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राजनीतिक स्थिरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। इससे न केवल राज्य के सामाजिक ताने-बाने में सुधार की उम्मीद बढ़ी है, बल्कि निवेश, रोजगार और विकास के कार्य भी तेज गति से आगे बढ़ सकेंगे।









